गौसेवा
गावो विश्वस्य मातरः।
गौसेवाए एक साधना
गौसेवाए एक साधना जो भीतर से बदलती है हमारे आश्रम में गौसेवा को केवल दिनचर्या नहीं माना जाता, यह एक दैनिक साधना है। जिस प्रकार प्रातःकाल की पूजा मन को ईश्वर से जोड़ती है, उसी प्रकार गौशाला में बिताया गया एक घण्टा मनुष्य को उस निर्मलता से जोड़ता है जो उसके भीतर सदा से है, पर जिसे वह भूल जाता है।
गोमाता और आयुर्वेद
आधुनिक शोध यह स्वीकार करने लगे हैं कि देशी गाय के घृत में A2 प्रोटीन होता है जो पाचन के लिए श्रेष्ठ है। गोमूत्र में ऐसे तत्त्व हैं जो रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। गोमय से बने उत्पाद वातावरण को शुद्ध करते हैं। लेकिन हमारे ऋषि इसे हजारों वर्ष पहले जानते थे। जब वे कहते थे कि गाय के आसपास रहने से मन शान्त होता है कृ तो यह अन्धविश्वास नहीं था। यह एक गहरा अनुभवजन्य ज्ञान था। आज का विज्ञान उसे प्रमाणित कर रहा है, और स्वीकार कर रहा है।
गाय केवल पशु नहीं, एक सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड
हमारे शास्त्रों ने गाय को यूँ ही माता नहीं कहा। जब ऋषियों ने गाय के भीतर झाँका, तो उन्हें दिखा तैंतीस कोटि देवताओं का वास। गोमाता की पीठ में सूर्यनाड़ी है। उसके दूध में अमृत-तत्त्व है। उसके घृत से हवन की अग्नि प्रज्वलित होती है और वह अग्नि केवल कमरे को नहीं, वायुमण्डल को शुद्ध करती है। गावो विश्वस्य मातरः कृ यह केवल श्लोक नहीं, एक वैज्ञानिक सत्य है जिसे हमारे पूर्वज हजारों वर्ष पहले जान चुके थे। गाय की सेवा केवल एक प्राणी की देखभाल नहीं, हम उस पूरी परम्परा को जीवित रखते हैं जिसने इस भूमि को सोने की चिड़िया बनाया था। हम उस संस्कृति के संवाहक बनते हैं जिसमें गाय और मनुष्य के बीच का सम्बन्ध केवल उपयोगिता का नहीं, आत्मीयता का था।
पिपा पीठ गौशाला
पीपा धाम की गौशालायें राजस्थान और वृन्दावन में स्थित हैं। वृन्दावन की भूमि वैसे भी असाधारण है। यहाँ की मिट्टी में कृष्ण की बाँसुरी की गूँज है। यहाँ की हवा में गोपियों के प्रेम की महक है। और यहाँ की गायों में कृ शायद कृ उन्हीं गोपों की आत्माएँ विचरण करती हैं जिन्होंने कभी कान्हा के साथ यमुना के किनारे चराई की थी। पिपा पीठ आश्रम की गौशाला इसी पावन भूमि पर स्थित है। यहाँ देशी नस्ल की गौमाताओं का संरक्षण किया जाता है कृ वे गाएँ जिन्हें आधुनिक युग ने उपयोगहीन समझकर छोड़ दिया। जो सड़कों पर भटकती हैं, भूखी रहती हैं, चोटें खाती हैं। उन्हें यहाँ आश्रय मिलता है। सेवा मिलती है। प्रेम मिलता है। और जो उनकी सेवा करता है कृ उसे मिलता है वह जो किसी तीर्थ में नहीं मिलता।
आप भी इस सेवा का हिस्सा बन सकते हैं
यदि आप वृन्दावन आएँ पीपा पीठ आश्रम की गौशाला आपके लिए खुली है। यहाँ आकर आप गौमाता को चारा खिला सकते हैं। उनकी सेवा में हाथ बँटा सकते हैं। यदि चाहें तो गौशाला के संचालन में आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं,। हर सहयोग, चाहे छोटा हो या बड़ा कृ उन गौमाताओं तक सीधे पहुँचता है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। और शास्त्र कहते हैं कृ जो गोमाता की सेवा करता है, उसके सात पीढ़ियों का उद्धार होता है। गावो विश्वस्य मातरः। गाय समस्त सृष्टि की माता है।