हमारे बारे में
श्री पीपा धाम का इतिहास और हमारे उद्देश्य को जानें।
श्री पीपा धाम, वृन्दावन
श्री पीपा धाम किसी एक गाँव, एक शहर, या एक प्रान्त तक सीमित नहीं सोचता। इसका स्वप्न है, भारत की सनातन संस्कृति और सेवाभाव को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाना।
हमारा उद्देश्य- सेवा, शिक्षा, संस्कृति
आध्यात्मिक साधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर हैं।
हमारा उद्देश्य- सेवा, शिक्षा, संस्कृति
इस आश्रम के उद्देश्य उतने ही व्यापक हैं जितना इसका हृदय। हमारे लिये सेवा ही साधना है। साधना ही मोक्ष है।

पहला- गौसेवा
हमारे लिए गौ माता पशु नहीं हमारी माता है — जिसके दर्शन और पूजन परिक्रमा से हमारे दिन का प्रारम्भ होता है। यह केवल भावनात्मक उद्गार नहीं, यह हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक मान्यता है। आज देशी नस्ल के गौवंश सड़कों पर भटक रहे हैं। उन्हें चोटें लगती हैं, भूख सहनी पड़ती है। हमारा आश्रम इन गौमाताओं के संरक्षण, पोषण और सेवा के लिए समर्पित है। गौशाला का संचालन, पशु-पक्षियों के लिए विशेष दाना-पानी की व्यवस्था, यह हमारी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च है। गौसेवा हमारे लिए धर्म का पहला पाठ है।

दूसरा- संस्कृत शिक्षा एवं सांस्कृतिक संरक्षण
संस्कृत केवल एक भाषा नही, वह ज्ञान का वह महासागर है जिसमें वेद, उपनिषद, पुराण, दर्शन और विज्ञान, सब समाहित हैं। आज इस भाषा को विस्मृति के खतरे का सामना है। हमारा ट्रस्ट संस्कृत के प्रचार-प्रसार, विद्यालयों एवं शिक्षा केन्द्रों के संचालन के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों से लेकर युवाओं तक, सभी के लिए संस्कृत की सुलभ शिक्षा की व्यवस्था हमारा संकल्प है। इसके साथ ही वृज चौरासी कोस के साहित्य का प्रचार-प्रसार, सम्पूर्ण सम्पदा एवं सांस्कृतिक अवशेषों का संरक्षण, प्राचीन घाटों की सुरक्षा, ये सब हमारे सांस्कृतिक उत्तरदायित्व हैं।

तीसरा- भागवत कथा एवं सनातन धर्म का प्रचार
श्रीमद्भागवत , यह वह ग्रन्थ है जो युगों से मनुष्य को जीवन का अर्थ समझाता आया है। इसकी कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह आत्मा का पोषण है। हमारा ट्रस्ट नियमित रूप से भागवत कथाओं का आयोजन करता है। सनातन धर्म के सिद्धान्तों को जन-जन तक पहुँचाना, मासिक-वार्षिक-त्रैमासिक पत्रिकाओं एवं पुस्तकों का प्रकाशन कृ यह हमारी आत्मा का कार्य है (वर्तमान में प्रक्रियाधीन है) हर पल, हर क्षण भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार।

चतुर्थ-मानव सेवा
जो समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग हैं, निर्धन, असहाय, बेसहारा- उनके लिए बिना किसी भेदभाव के शिक्षा, चिकित्सा, भोजन और वस्त्र की व्यवस्था करना। गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग देना। विकलांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा और छात्रवृत्ति दिलाना। वृद्धजनों के लिए आश्रय और सम्मान की व्यवस्था करना। क्योंकि हमारा मानना है, जहाँ एक भी मनुष्य भूखा सोता है, वहाँ धर्म अधूरा है।

वृन्दावन कृ हमारी जड़ें
इस ट्रस्ट का मुख्यालय वृन्दावन में होना कोई संयोग नहीं। वृन्दावन वह भूमि है जहाँ की मिट्टी में कृष्ण की बाँसुरी की गूँज है। जहाँ की हवा में राधारानी के प्रेम की सुगन्ध है। जहाँ हर गली, हर कुञ्ज, हर घाट किसी न किसी दिव्य लीला का साक्षी रहा है। ऐसी भूमि पर स्थापित संस्था का उद्देश्य भी उतना ही पावन हो सकता है कृ और यही हमारी प्रेरणा है।
हमारी प्रतिज्ञा है –
गौमाता की रक्षा करेंगे। संस्कृत की ज्योति जलाए रखेंगे। भागवत की कथा घर–घर पहुँचाएँगे। निर्धन और असहाय की सेवा को ईश्वर की पूजा मानेंगे।
और इस प्रतिज्ञा को हम चिरन्तन काल तक निभाते रहेंगे।
आपका स्वागत है यह ट्रस्ट केवल कुछ लोगों का नहीं कृ यह उन सबका है जो इस स्वप्न को अपना मानते हैं। यदि आप भी इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं कृ गौसेवा में, शिक्षा में, भागवत प्रचार में, या किसी भी रूप में कृ तो आपके लिए यहाँ एक स्थान सदा आरक्षित है। क्योंकि सेवा का मार्ग अकेले नहीं चला जाता। यह मार्ग तब और सुन्दर होता है जब सब साथ चलते हैं। आइए, साथ मिलकर एक ऐसे समाज की नींव रखें जहाँ गाय सुरक्षित हो, बच्चा शिक्षित हो, बुज़ुर्ग सम्मानित हो, और हर हृदय में भगवान का नाम हो।
सेवा ही साधना है। साधना ही मोक्ष है।
हमसे जुड़ें
हर कदम पर आपकी मदद आवश्यक है। चलिए, हम सब मिलकर एक सकारात्मक बदलाव लाएँ।